मुहावरे और उनके अर्थ-प्रसिद्ध हिंदी मुहावरे -Muhavare in Hindi, Meaning, Examples

मुहावरे और उनके अर्थ-प्रसिद्ध हिंदी मुहावरे -Muhavare in Hindi, Meaning, Examples

मुहावरे भाषा को प्रभावशाली और अभिव्यक्तिपूर्ण बनाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। ये ऐसे वाक्यांश होते हैं, जिनका शाब्दिक अर्थ न लेकर उनके विशेष अर्थ को समझना आवश्यक होता है। हिंदी भाषा में अनेक मुहावरे प्रचलित हैं, जो दैनिक जीवन में, साहित्य में, और प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुहावरे (अ) और उनके अर्थ

  • अत्र-जल उठना (रहने का संयोग न होना, मरना) – मालूम होता है कि तुम्हारा यहाँ से अत्र-जल उठ गया है, जो सबसे बिगाड़ किए रहते हो।
  • अपना किया पाना (कर्म का फल भोगना) – बेहूदों को जब मुँह लगाया है, तो अपना किया पाओ। झखते क्या हो?
  • अपनी खिचड़ी अलग पकाना (स्वार्थी होना, अलग रहना) – यदि सभी अपनी खिचड़ी अलग पकाने लगें, तो देश और समाज की उन्नति होने से रही।
  • अपने पाँव आप कुल्हाड़ी मारना (संकट मोल लेना) – उससे तकरार कर तुमने अपने पाँव आप कुल्हाड़ी मारी है।
  • अब-तब करना (बहाना बनाना) – कोई भी चीज माँगो, वह अब-तब करना शुरू कर देगा।
  • अब-तब होना (परेशान करना या मरने के करीब होना) – दवा देने से क्या! वह तो अब-तब हो रहा है।
  • अंग-अंग ढीला होना (अत्यधिक थक जाना) – विवाह के अवसर पर दिन भर मेहमानों के स्वागत में लगे रहने से मेरा अंग-अंग ढीला हो गया।
  • अंगारे उगलना (कठोर और कड़वी बातें कहना) – मित्र! अवश्य कोई बात होगी, बिना बात कोई क्यों अंगारे उगलेगा?
  • अंगारों पर लोटना (ईर्ष्या से व्याकुल होना) – मेरे सुख को देखकर रामू अंगारों पर लोटता है।
  • अँगुली उठाना (किसी के चरित्र या ईमानदारी पर संदेह करना) – मित्र! हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे कोई हम पर अँगुली उठाए।
  • अँगुली पकड़कर पहुँचा पकड़ना (थोड़ा पाकर अधिक पाने की कोशिश करना) – जब भिखारी एक रुपया देने के बाद और रुपए माँगने लगा तो मैंने उससे कहा- अँगुली पकड़कर पहुँचा पकड़ते हो, जाओ यहाँ से।
  • अँगूठा छाप (अनपढ़ व्यक्ति) – रामेश्वर अँगूठा छाप है, परंतु अब वह पढ़ना चाहता है।
  • अंगूर खट्टे होना (कोई वस्तु न मिलने पर उससे विरक्त होना) – जब लोमड़ी को अंगूर नहीं मिले तो वह कहने लगी कि अंगूर खट्टे हैं।
  • अंजर-पंजर ढीला होना (शरीर शिथिल होना, बहुत थक जाना) – दिन-भर भागते-भागते आज तो मेरा अंजर-पंजर ढीला हो गया।
  • अंडे सेना (घर से बाहर न निकलना, निष्क्रिय रहना) – रामू की पत्नी ने कहा कि कुछ काम करो, अंडे सेने से काम नहीं चलेगा।
  • अंतड़ियों के बल खोलना (बहुत दिनों के बाद भरपेट भोजन करना) – आज पंडित जी का न्योता है, आज वे अपनी अंतड़ियों के बल खोल देंगे।
  • अंतड़ियों में बल पड़ना (पेट में दर्द होना) – दावत में खाना अधिक खाकर मेरी तो अंतड़ियों में बल पड़ गए।
  • अंतिम घड़ी आना (मौत निकट आना) – शायद रामू की दादी की अंतिम घड़ी आ गई है। वह पंद्रह दिन से बिस्तर पर पड़ी है।
  • अंधा बनना (जान-बूझकर अनदेखा करना) – अरे मित्र! तुम तो जान-बूझकर अंधे बन रहे हो- सब जानते हैं कि रामू पैसे वापस नहीं करता, फिर भी तुमने उसे पैसे उधार दे दिए।
  • अंधे के हाथ बटेर लगना (अनाड़ी आदमी को सफलता प्राप्त होना) – रामू मात्र आठवीं पास है, फिर भी उसकी सरकारी नौकरी लग गई। इसी को कहते हैं- अंधे के हाथ बटेर लगना।
  • अंधे को दो आँखें मिलना (मनोरथ सिद्ध होना) – एम.ए., बी.एड. करते ही प्रेम की नौकरी लग गई। उसे और क्या चाहिए- अंधे को दो आँखें मिल गईं।
  • अंधेर मचना (अत्याचार होना) – औरंगजेब ने अपने शासनकाल में बहुत अंधेर मचाया था।
  • अक्ल का अंधा (मूर्ख व्यक्ति) – वह अक्ल का अंधा नहीं, जैसा कि आप समझते हैं।
  • अक्ल के पीछे लट्ठ लेकर फिरना (हर वक्त मूर्खता करना) – रमेश तो हर वक्त अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरता है- चीनी लेने भेजा था, नमक लेकर आ गया।
  • अक्ल घास चरने जाना (समय पर बुद्धि का काम न करना) – अरे मित्र! लगता है, तुम्हारी अक्ल घास चरने गई है तभी तो तुमने सरकारी नौकरी छोड़ दी।
  • अक्ल ठिकाने लगना (गलती समझ में आना) – जब तक उस चोर को पुलिस के हवाले नहीं करोगे, उसकी अक्ल ठिकाने नहीं आएगी।
  • अगर-मगर करना (तर्क करना या टालमटोल करना) – ज्यादा अगर-मगर करो तो जाओ यहाँ से; हमें तुम्हारे जैसा नौकर नहीं चाहिए।
  • अपना रास्ता नापना (चले जाना) – मैंने रामू को उसकी कृपा का धन्यवाद देकर अपना रास्ता नापा।
  • अपना सिक्का जमाना (प्रभुत्व स्थापित करना) – रामू ने कुछ ही दिनों में अपने मोहल्ले में अपना सिक्का जमा लिया है।
  • अपना सिर ओखली में देना (जान-बूझकर संकट मोल लेना) – खटारा स्कूटर खरीदकर मोहन ने अपना सिर ओखली में दे दिया है।
  • अपनी खाल में मस्त रहना (अपने आप में संतुष्ट रहना) – वह तो अपनी खाल में मस्त रहता है, उसे किसी से कोई मतलब नहीं है।
  • अढ़ाई चावल की खिचड़ी अलग पकाना (सबसे अलग रहना) – मोहन आजकल अढ़ाई चावल की खिचड़ी अलग पकाते है।
  • अंगारों पर पैर रखना (अपने को खतरे में डालना, इतराना) – भारतीय सेना अंगारों पर पैर रखकर देश की रक्षा करती है।
  • अक्ल का अजीर्ण होना (आवश्यकता से अधिक अक्ल होना) – सोहन किसी भी विषय में दूसरे को महत्व नहीं देता है, उसे अक्ल का अजीर्ण हो गया है।
  • अक्ल दंग होना (चकित होना) – मोहन को पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता लेकिन परीक्षा परिणाम आने पर सबका अक्ल दंग हो गया।
  • अक्ल का पुतला (बहुत बुद्धिमान व्यक्ति) – विदुर जी अक्ल का पुतला थे।
  • अंत पाना (भेद पाना) – उसका अंत पाना कठिन है।
  • अंतर के पट खोलना (विवेक से काम लेना) – हर हमेशा हमें अंतर के पट खोलना चाहिए।
  • अक्ल के घोड़े दौड़ाना (कल्पनाएँ करना) – वह हमेशा अक्ल के घोड़े दौड़ाता रहता है।
  • अपने दिनों को रोना (अपनी स्वयं की दुर्दशा पर शोक प्रकट करना) – वह तो हर वक्त अपने ही दिनों को रोता रहता है, इसलिए कोई उससे बात नहीं करता।
  • अलाउद्दीन का चिराग (आश्चर्यजनक या अद्भुत वस्तु) – रामू कलम पाकर ऐसे चल पड़ा जैसे उसे अलाउद्दीन का चिराग मिल गया हो।
  • अल्लाह को प्यारा होना (मर जाना) – मुल्लाजी कम उम्र में ही अल्लाह को प्यारे हो गए।
  • अपनी डफली आप बजाना (अपने मन की करना) – राधा दूसरे की बात नहीं सुनती, वह हमेशा अपनी डफली आप बजाती है।

    मुहावरे और उनके अर्थ – FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    🔹 Q1: मुहावरा किसे कहते हैं?
    👉 उत्तर: मुहावरा एक ऐसा वाक्यांश या शब्द समूह होता है, जिसका शाब्दिक अर्थ न लेकर उसका विशेष अर्थ निकाला जाता है। यह भाषा को प्रभावशाली और रोचक बनाता है।

    🔹 Q2: हिंदी में मुहावरों का क्या महत्व है?
    👉 उत्तर: हिंदी में मुहावरे संवाद को आकर्षक और प्रभावशाली बनाते हैं। ये साहित्य, लेखन और बोलचाल में गहराई और प्रभाव जोड़ते हैं।

    🔹 Q3: मुहावरों का उपयोग कहाँ किया जाता है?
    👉 उत्तर: मुहावरों का उपयोग हिंदी साहित्य, लेखन, कविता, निबंध, संवाद, समाचार, कहानियों और सामान्य बोलचाल में किया जाता है।

    🔹 Q4: कुछ प्रमुख हिंदी मुहावरों के उदाहरण क्या हैं?
    👉 उत्तर:

    • अंगारे उगलना – कठोर और कड़वी बातें कहना
    • अपना किया पाना – अपने कर्म का फल भोगना
    • अंधे के हाथ बटेर लगना – अयोग्य व्यक्ति को अचानक सफलता मिलना
    • अक्ल घास चरने जाना – समय पर बुद्धि का सही उपयोग न करना
    • अपनी खिचड़ी अलग पकाना – स्वार्थी होना या अलग रहना

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