Amendment Of Indian Constitution-भारत के संविधान का संशोधन gk questions

Amendment Of Indian Constitution

Amendment Of Indian Constitution-भारत के संविधान का संशोधन gk questions संविधान संशोधन का अर्थ है संविधान में आवश्यक बदलाव, सुधार या जोड़ करना ताकि इसे समय, परिस्थितियों और देश की जरूरतों के अनुसार अनुकूल और प्रभावी बनाया जा सके। यह प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 में उल्लिखित है।

Amendment Of Indian Constitution

चौहत्तरवाँ संशोधन (1993 ई.) : इसके अंतर्गत संविधान में 12वीं अनुसूची शामिल की गयी, जिसमें नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषदों से संबंधित प्रावधान किये गये हैं। इस संशोधन के द्वारा संविधान में भाग-9 क जोड़ा गया। इसमें अनुच्छेद 243 से अनुच्छेद-243 यद तक के अनुच्छेद हैं।

नोट: 73वाँ संविधान संशोधन 25.04.1993 से और 74वाँ 01.06.1993 से प्रवृत्त हुआ है।

छिहत्तरवाँ संशोधन (1994 ई.) : इस संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान की नौवीं अनुसूची में संशोधन किया गया है और तमिलनाडु सरकार द्वारा पारित पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में 69% आरक्षण का उपबन्ध करने वाली अधिनियम को नौवीं अनुसूची में शामिल कर दिया गया है।

अठहत्तरवाँ संशोधन (1995 ई.) इसके द्वारा नौवीं अनुसूची में विभिन्न राज्यों द्वारा पारितं 27 भूमि सुधार विधियों को समाविष्ट किया गया है । इस प्रकार नौवीं अनुसूची में सम्मिलित अधिनियमों की कुल संख्या 284 हो गयी है।

उन्नासीवाँ संशोधन (1999 ई.): अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि 25 जनवरी 2010 तक के लिए बढ़ा दी गई है। इस संशोधन के माध्यम से व्यवस्था की गई कि अब राज्यों को प्रत्यक्ष केन्द्रीय करों से प्राप्त कुल धनराशि का 29% हिस्सा मिलेगा।

बेरासीवाँ संशोधन (2000 ई.) : इस संशोधन के द्वारा राज्यों को सरकारी नौकरियों में आरक्षित रिक्त स्थानों की भर्ती हेतु प्रोन्नति के मामलों में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के अभ्यर्थियों के लिए १ न्यूनतम प्राप्तांकों में छूट प्रदान करने की अनुमति प्रदान की गई है।

तिरासीवाँ संशोधन (2000 ई.): इस संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान न करने की छूट प्रदान की गई है। अरुणाचल प्रदेश में कोई भी अनुसूचित जाति न होने के कारण उसे यह छूट प्रदान की गई है।

चौरासीवाँ संशोधन (2001 ई.) इस संशोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा तथा विधानसभाओं की सीटों की संख्या में वर्ष 2026 ई. तक कोई परिवर्तन न करने का प्रावधान किया गया है।

पचासीवाँ संशोधन (2001 ई.): सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति / जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था ।

छियासीवाँ संशोधन (2002 ई.): इस संशोधन अधिनियम द्वारा देश के 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने संबंधी प्रावधान किया गया है, इसे अनुच्छेद 21 (क) के अन्तर्गत संविधान में जोड़ा गया है। इस अधिनियम द्वारा संविधान के अनुच्छेद 45 तथा अनुच्छेद-51 (क) में संशोधन किये जाने का प्रावधान है।

सतासीवाँ संशोधन (2003 ई.): परिसीमन में जनसंख्या का आधार 1991 ई. की जनगणना के स्थान पर 2001 ई. कर दी गई है।
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अठासीवाँ संशोधन (2003 ई.) सेवाओं पर कर का प्रावधान नवासीवाँ संशोधन (2003 ई.) अनुसूचित जनजाति के लिए पृथक्

नब्बेवाँ संशोधन (2003 ई.) असम विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों और गैर अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व बरकरार रखते हुए बोडोलैंड, टेरीटोरियल कौंसिल क्षेत्र, गैर जनजाति के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा।

इक्यानवेयाँ संशोधन (2003 ई.): दल-बदल व्यवस्था में संशोधन केवल सम्पूर्ण दल के विलय को मान्यता, केन्द्र तथा राज्य में मंत्रिपरिषद् के सदस्य संख्या क्रमशः लोकसभा तथा विधानसभा की सदस्य संख्या का 15% होगा (जहाँ सदन की सदस्य संख्या 40-40 है, वहाँ अधिकतम 12 होगी)।

तिरानवेवाँ संशोधन (2006 ई.) शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति / जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के नागरिकों के दाखिले के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद-15 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत की गई है।

चौरानवेवाँ संशोधन (2006 ई.) इस संशोधन द्वारा बिहार राज्य को एक जनजाति कल्याण मंत्री नियुक्त करने के उत्तरदायित्व से मुक्त कर दिया गया तथा इस प्रावधान को झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्यों में लागू करने की व्यवस्था की गई। मध्यप्रदेश एवं ओडिशा राज्य में वह प्रावधान पहले से ही लागू है ।

पंचानबेवाँ संशोधन (2009 ई.): इस संशोधन द्वारा अनुच्छेद-334 में संशोधन कर लोकसभा में अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण एवं आंग्ल-भारतीयों को मनोनीत करने संबंधी प्रावधान को 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

96याँ संविधान संशोधन (2011 ई.) संविधान की 8वीं अनुसूची में ‘उडिया’ के स्थान पर ‘ओडिया’ लिखा जाए।

97वाँ संविधान संशोधन (2011 ई.) इस संशोधन के द्वारा सहकारी समितियों को एक संवैधानिक स्थान एवं संरक्षण प्रदान किया गया। संशोधन द्वारा संविधान में निम्नलिखित तीन बदलाव किए गए- 1. सहकारी समिति बनाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार बन गया। [अनुच्छेद-19 (1) ग] 2. राज्य की नीति में सहकारी समितियों को बढ़ावा देने का एक नया नीति निदेशक सिद्धांत का समावेश । ( अनुच्छेद- 43 ख) 3. ‘सहकारी समितियाँ’ नाम से एक नया भाग-IX – ख संविधान में जोड़ा गया।

98वाँ संविधान संशोधन (2012 ई.) : संविधान में अनुच्छेद-371 (जे) शामिल किया गया। इसका उद्देश्य कर्नाटक के राज्यपाल को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के विकास हेतु कदम उठने के लिए सशक्त करना था।

99वाँ संविधान संशोधन (2014 ई.): राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की स्थापना। असवैधानिक करार

100वाँ संविधान संशोधन (2015 ई.): भारत-बांग्लादेश भूमि हस्तांतरण। 111 क्षेत्र 01B को WB नेडा क्षेत्र भारत का
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101वाँ संविधान संशोधन (2016 ई.) इसके द्वारा वस्तु सेवाकर को लागू किया गया। GST
एवं
102वाँ संविधान संशोधन (2018 ई.) : इस अधिनियम द्वारा संविधान में अनुच्छेद 338 ख को जोड़ते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा व आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। संघ एवं राज्य सरकार सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत मामलों में आयोग से परामर्श करेगी ।

• 103वाँ संविधान संशोधन (2019 ई.): इस संशोधन के माध्यम से संविधान में दो नए अनुच्छेद 15 (6) एवं 16 (6) को जोड़ा गया है। इस संविधान संशोधन से पूर्व में आरक्षण, सामाजिक व शैक्षिक रहा है, किंतु इस संशोधन के द्वारा ‘आर्थिक वंचना’ को भी पिछड़ेपन पिछड़ापन को आधार मानते हुए जातिगत आधार पर ही दिया जाता का आधार स्वीकार करते हुए 10% आरक्षण की व्यवस्था की गयी है।

संविधान का निष्कर्ष

भारतीय संविधान देश की आत्मा और लोकतंत्र का आधार है। यह न केवल भारत के नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों को परिभाषित करता है, बल्कि सरकार की संरचना, शक्तियाँ और दायित्व भी निर्धारित करता है।संविधान का निर्माण समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्यात्मक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया था, ताकि देश में समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व स्थापित किया जा सके।

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