savidhan sanshodhan in hindi-भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधन

   samvidhan sanshodhan in hindi-भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधन भारतीय संविधान में बदलाव करने की प्रक्रिया को संविधान संशोधन कहते हैं. संविधान में संशोधन करने की शक्ति संसद को दी गई है. संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया और नियम संविधान के अनुच्छेद 368 में बताए गए हैं. 

savidhan sanshodhan in hindi

 

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पहला संशोधन (1951 ई.) : इसके माध्यम से स्वतंत्रता, समानत एवं संपत्ति से संबंधित मौलिक अधिकारों को लागू किये जाने संबंधी कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया गया । भाषण एवं अभिव्यक्ति के मूल अधिकारों पर इसमें उचित प्रतिबंध की व्यवस्था की गई। साथ ही, इस संशोधन द्वारा संविधान में नौवीं अनुसूची को जोड़ा गया, जिसमें उल्लिखित कानूनों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्तियों के अंतर्गत परीक्षा नहीं की जा सकती है ।

दूसरा संशोधन (1952 ई.) : इसके अंतर्गत 1951 ई. की जनगणना के आधार पर लोकसभा में प्रतिनिधित्व को पुनर्व्यवस्थित किया गया ।

तीसरा संशोधन (1954 ई.) : इसके अंतर्गत सातवीं अनुसूची को समवर्ती सूची की 33वीं प्रविष्टि के स्थान पर खाद्यान्न, पशुओं के लिए चारा, कच्चा कपास, जूट आदि को रखा गया, जिसके उत्पादन एवं आपूर्ति को लोकहित में समझने पर सरकार उस पर नियंत्रण लगा सकती है।

चौथा संशोधन (1955 ई.) : इसके अंतर्गत व्यक्तिगत संपत्ति को लोकहित में राज्य द्वारा हस्तगत किये जाने की स्थिति में, न्यायालय इसकी क्षतिपूर्ति के संबंध में परीक्षा नहीं कर सकती ।

पांचवाँ संशोधन (1955 ई.) : राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदान की गई कि वह राज्यों के क्षेत्र, सीमा और नामों को प्रभावित करने वाले प्रस्तावित केंद्रीय विधान पर अपने मत देने के लिए राज्य मंडलों हेतु समय-सीमा का निर्धारण करें ।
गया ।

छठा संशोधन (1956 ई.) : इस संशोधन द्वारा सातवीं अनुसूची के संघ सूची में परिवर्तन कर अंतरराज्यीय बिक्री कर के अंतर्गत कुछ वस्तुओं पर केंन्द्र को कर लगाने का अधिकार दिया

7 वा  संशोधन (1956 ई.) 4 इस 14 शोध द्वारा भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया, जिसमें पहले के तीन श्रेणियों में राज्यों के वर्गीकरण को समाप्त करते हुए राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में उन्हें विभाजित किया गया। साथ ही, इनके अनुरूप केन्द्र एवं राज्य की विधान पालिकाओं में सीटों को पुनर्व्यवस्थित किया गया।

फजल अली आठवाँ संशोधन (1959 ई.) : इसके अंतर्गत केन्द्र एवं राज्यों के निम्न सदनों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं आँग्ल-भारतीय समुदायों के आरक्षण संबंधी प्रावधानों को दस वर्षों के लिए अर्थात् 1970 ई. तक बढ़ा दिया गया ।
नौवाँ संशोधन (1960 ई.): इसके द्वारा संविधान की प्रथम अनुसूची में परिवर्तन करके भारत और पाकिस्तान के बीच 1958 की संधि की शर्तों के अनुसार बेरुबारी, खुलना आदि क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिये गये ।

दसवाँ संशोधन (1961 ई.) : इसके अंतर्गत भूतपूर्व पुर्तगाली अंतःक्षेत्रों दादर एवं नगर हवेली को भारत में शामिल कर उन्हें केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया।

ग्यारहवाँ संशोधन (1961 ई.) इसके अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के प्रावधानों में परिवर्तन कर, इस संदर्भ में दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को बुलाया गया। साथ ही यह भी निर्धारित किया

बारहवाँ संशोधन (1962 ई.) : इसके अंतर्गत संविधान की सूची  संशोधन कर गोवा, दमन एवं दीव को भारत में केंद्रशासि देश के रूप में शामिल कर लिया गया।

तेरहवाँ संशोधन (1962 ई.) इसके अंतर्गत नागालैंड के संबंध विशेष प्रावधान अपनाकर उसे एक राज्य का दर्जा दे दिया गया।

चौदहवाँ संशोधन (1963 ई.) इसके द्वारा केंद्रशासित प्रदेश के स में पुदुचेरी को भारत में शामिल किया गया। साथ ही, इसके द्वारा हिमाच प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा, दमन और दीव तथा पुदुचेरी केंद्रशासि प्रदेशों में विधानपालिका एवं मंत्रिपरिषद् की स्थापना की गई।

पंद्रहवाँ संशोधन (1963 ई.) इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय व न्यायाधीशों की सेवामुक्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी ग तथा अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों की उच्च न्यायालय में नियुक्ति से संबंधित प्रावधान बनाये गये ।

सोलहवाँ संशोधन (1963 ई.) : इसके द्वारा देश की संप्रभुता एव अखंडता के हित में मूल अधिकारों पर कुछ प्रतिबंध लगाने के प्रावधान रखे गये। साथ ही तीसरी अनुसूची में भी परिवर्तन कर शपथ ग्रहण के अंतर्गत ‘मैं भारत की स्वतंत्रता एवं अखण्डता को बनाए रखूँगा’ जोड़ा गया।

सत्रहवाँ संशोधन (1964 ई.) इसमें संपत्ति के अधिकारों में और भी संशोधन करते हुए कुछ अन्य भूमि सुधार प्रावधानों को नौवीं अनुसूची में रखा गया, जिनकी वैधता की परीक्षा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती थी ।

अठारहवाँ संशोधन (1966 ई.) इसके अंतर्गत पंजाब का भाषायी आधार पर पुनर्गठन करते हुए पंजाबी भाषी क्षेत्र को पंजाब एवं हिन्दी भाष क्षेत्र को हरियाणा के रूप में गठित किया गया। पर्वतीय क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को दे दिये गये तथा चंडीगढ़ को केन्द्रशासित प्रदेश बनाया गया।

उन्नीसवाँ संशोधन (1966 ई.) इसके अंतर्गत चुनाव आयोग के अधिकारों में परिवर्तन किया गया एवं उच्च न्यायालयों को चुनाव- याचिकाएँ सुनने का अधिकार दिया गया ।

बीसवाँ संशोधन (1966 ई.) : इसके अंतर्गत अनियमितता के आधार पर नियुक्त कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति को वैधता प्रदान की गई।

Vइक्कीसवाँ संशोधन (1967 ई.) इसके द्वारा सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची के अंतर्गत 15वीं भाषा के रूप में शामिल किया गया।

बाईसवाँ संशोधन (1969 ई.) : इसके द्वारा असम से अलग करके एक नया राज्य मेघालय बनाया गया।

तेईसवाँ संशोधन (1969 ई.) इसके अंतर्गत विधान पालिकाओं में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण एवं आँख भारतीय समुदाय के लोगों का मनोनयन और दस वर्षों के लिए बड़ा
नौ दिया गया।

चौबीसवाँ संशोधन (1971 ई.): इस संशोधन के अंतर्गत संसद की इस शक्ति को स्पष्ट किया गया कि वह संविधान के किसी भी भाग को जिसमें भाग तीन के अंतर्गत आने वाले मूल अधिकार भी हैं, संशोधित जायेगा तो इस पर राष्ट्रपति द्वारा सम्मति दिया जाना बाध्यकारी होगा।

पच्चीसावाँ संशोधन (1971 ई.) : संपत्ति केमूल अधिकारमें कटौती। अनुच्छेद-39 (ख) या (ग) में वर्णित निदेशक तत्वों को प्रभावी करने के लिए बनाई गई किसी भी विधि को अनुच्छेद-14 19 और 31 द्वारा अभिनिश्चित अधिकारों के उल्लंखन के आधार पर चुनौती के शासकों की विशेष उपाधियों एवं उनके प्रिवीपर्स/को समाप्त कर

छब्बीसवाँ संशोधन (1971 ई.) इसके अंतर्गत भूतपूर्व देशी राज्यों नहीं दी जा सकती ।

सत्ताईस इसके अंतर्गत मिजोरम एवंअरुणाचल प्रदेश को केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में स्थापित किया गया।

उनतीसवाँ संशोधन (1972 ई.) इसके अंतर्गत केरल भू-सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1969 तथा केरल भू-सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1577 को संविधान की नौवीं अनुसूची में रख दिया गया, जिससे इसकी वैधानिक वैधता को न्यायालय में चुनौती न दी जा सके।

इकतीसवाँ संशोधन (1973 ई.) : इसके द्वारा लोकसभा के सदस्यों श्री संख्या 525 से 545 कर दी गई तथा केन्द्रशासित प्रदेशों कानिधित्व, 25 से घटाकर 20 कर दिया गया।

बत्तीसवाँ संशोधन (1974 ई.) इसके द्वारा संसद एवं विधान पालिकाओं के सदस्यों द्वारा दबाव में या जबरदस्ती किये जाने पर इस्तीफा देना अवैध घोषित किया गया एवं अध्यक्ष को यह अधिकार | दिया गया कि वह सिर्फ स्वेच्छा से दिये गये एवं उचित त्यागपत्र कोही स्वीकार करे ।

चौंतीसवाँ संशोधन (1974 ई.) इसके अंतर्गत विभिन्न राज्यों द्वारा पारित बीस भू-सुधार अधिनियमों को नौवीं अनुसूची में प्रवेश देते | उन्हें न्यायालय द्वारा संवैधानिक वैधता के परीक्षण से मुक्त किया गया।

पैंतीसवाँ संशोधन (1974 ई.): इसके अंतर्गत सिक्किम का संरक्षित राज्यों का दर्जा समाप्त कर उसे सम्बद्ध राज्य के रूप में भारत में प्रवेश दिया गया ।

छत्तीसवाँ संशोधन (1975 ई.) : इसके अंतर्गत सिक्किम को भारत का बाईसवाँ राज्य बनाया गया।

सैंतीसवाँ संशोधन (1975 ई.) : इसके तहत आपात स्थिति की घोषणा और राष्ट्रपति, राज्यपाल एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासनिक प्रधानों द्वारा अध्यादेश जारी किये जाने को अविवादित बनाते हुए | न्यायिक पुनर्विचार से उन्हें मुक्त रखा गया।

उनतालीसवाँ संशोधन (1975 ई.) इसके द्वारा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोकसभाध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी विवादों को न्यायिक परीक्षण से मुक्त कर दिया गया।

इकतालीसवाँ संशोधन (1976 ई.) इसके द्वारा राज्य लोकसेवा आयोग के सदस्यों की सेवा मुक्ति की आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई, पर संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की सेवा-निवृत्ति की अधिकतम आयु 65 वर्ष रहने दी गई।

बयालीसवाँ संशोधन (1976 ई.) इसके द्वारा संविधान में व्यापक परिवर्तन लाये गये, जिनमें से मुख्य निम्नलिखित थे—(क) संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ एवं ‘एकता और अखण्डता आदि शब्द जोड़े गये। (ख) सभी नीति-निर्देशक सिद्धान्तों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्चता सुनिश्चित की गई। (ग) इसके अंतर्गत संविधान में दस मौलिक कर्त्तव्यों को अनुच्छेद-51 (क), (भाग-iv क) के अंतर्गत जोड़ा गया। (घ) इसके द्वारा संविधान को न्यायिक परीक्षण से मुक्त किया गया। (ङ) सभी विधानसभाओं एवं लोकसभा की सीटों की संख्या क इस शताब्दी के अंत तक के लिए स्थिर कर दिया गया। (च) लोकसभा एवं विधानसभाओं की अवधि को पाँच से छह वर्ष कर दिया गया। (छ) इसके द्वारा यह निर्धारित किया गया कि किसी केन्द्रीय कानून क वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय एवं राज्य के कानून की वैधता का उच्च पायालय ही परीक्षण करेगा। साथ ही, यह भी निर्धारित किया गयाकि किसी संवैधानिक वैधता के प्रश्न पर पाँच से अधिक न्यायाधीशां की बेंच द्वारा दो-तिहाई बहुमत से निर्णय दिया जाना चाहिए और प न्यायाधीशों की संख्या पाँच तक हो तो निर्णय सर्वसम्मति से होन चाहिए। (ज) इसके द्वारा वन-संपदा, शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण आि विषयों को राज्य सूची से समवर्ती सूची के अंतर्गत कर दिया गया (झ) इसके अंतर्गत निर्धारित किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् ए मंत्री की सलाह के अनुसार कार्य करेगा।

 

यहाँ संविधान संशोधन से जुड़े  प्रश्न दिए गए हैं:

1. संविधान संशोधन क्या होता है?

उत्तर: संविधान संशोधन का अर्थ है संविधान में परिवर्तन, सुधार या जोड़ करना ताकि इसे समय और आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूल बनाया जा सके।

2. संविधान संशोधन की प्रक्रिया कौन सी है?

उत्तर: संविधान संशोधन की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 में दी गई है, जिसके तहत संसद संशोधन प्रस्ताव पास करती है।

3. संविधान संशोधन कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: भारतीय संविधान में संशोधन तीन प्रकार से किए जाते हैं

साधारण बहुमत द्वारा (जैसे संसद के नियमों में बदलाव)विशेष बहुमत द्वारा (संविधान के मूल ढांचे में बदलावविशेष बहुमत और राज्यों की सहमति से (संघीय ढांचे से जुड़े विषयों के लिए)

4. भारत में पहला संविधान संशोधन कब हुआ था और क्यों?

उत्तर: पहला संविधान संशोधन 1951 में हुआ था, जिसमें अनुच्छेद 19 में बदलाव कर भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े कुछ प्रतिबंध जोड़े गए थे।

5. अब तक कितने संविधान संशोधन हो चुके हैं?

उत्तर: फरवरी 2025 तक, भारतीय संविधान में 106 से अधिक संशोधन किए जा चुके हैं।

6. संविधान संशोधन बिल कौन पेश कर सकता है?

उत्तर: संविधान संशोधन का प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा में कोई भी सांसद पेश कर सकता है, लेकिन इसे सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है।

7. क्या सभी संशोधन राज्यों की सहमति से होते हैं?

उत्तर: नहीं, केवल संघीय ढांचे से जुड़े संशोधनों (जैसे राज्य सरकारों की शक्तियों से संबंधित संशोधन) के लिए कम से कम आधे राज्यों की मंजूरी जरूरी होती है।

8. संविधान संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट का क्या नियंत्रण है?

उत्तर: केशवानंद भारती केस (1973) के अनुसार, संसद संविधान संशोधित कर सकती है, लेकिन संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) को नहीं बदल सकती

9. सबसे महत्वपूर्ण संविधान संशोधन कौन-से हैं?

उत्तर: कुछ प्रमुख संशोधन ये हैं:

42वां संशोधन (1976): मौलिक कर्तव्य जोड़े गए, “समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्द जोड़े गए।

44वां संशोधन (1978): संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाया गया।

73वां संशोधन (1992): पंचायती राज प्रणाली को संवैधानिक दर्जा मिला।

10. संविधान संशोधन से जुड़े कुछ विवादास्पद मामले कौन-से हैं?

उत्तर:

केशवानंद भारती केस (1973): संसद के संशोधन अधिकार को सीमित किया गया।

नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन (NJAC) केस (2015): NJAC संशोधन को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।

 निष्कर्ष 

संविधान संशोधन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिससे संविधान को समय के अनुसार बदला और बेहतर बनाया जा सकता है। यह देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए आवश्यक है, लेकिन साथ ही, इसे संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित किए बिना किया जाना चाहिए।

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